कलियुग मे बुराई की लड़ाई

सब जानते है चार युग है:
१. सतयुग (भगवान श्री नरसिंह)
२. त्रेता (भगवान श्री राम)
३. द्वापर (भगवान श्री कृष्ण)
४. कलयुग ( वर्तमान)
सतयुग मे युद्ध होता था दो लोकों के बीच
देवलोक और असुर लोक अच्छाई और बुराई के बीच अलग-अलग दुनियाँ का
त्रेता युग मे युद्ध हुआ श्री राम और रावण के बीच एक ही लोक (पृथ्वी पर) मे अलग -अलग देशों का,अच्छाई और बुराई के बीच
द्वापर युग मे युद्ध हुआ महाभारत एक ही कुल और परिवार के बीच पांडवों और कौरवों के बीच, अच्छाई और बुराई के बीच
अब ध्यान दीजिये अच्छाई और बुराई की लड़ाई पर जो लगातार नज़दीकी आ रही है पहले दूर लोक मे फिर दूसरे देश उसके बाद परिवार के सदस्यों तक पहुँची
और आज के युग कलियुग मे और क़रीब स्वयं मे आ गयी है हमारे भीतर अब ख़ुद के भीतर ही लड़ना है दोनो को, सोचो, पहचानो और ख़ुद में छुपी बुराइयों से लड़ो