माता वैष्णों देवी

माता वैष्णों देवी भगवान विष्णु की प्रेरणा से तीनों महाशक्तियों के तेज पुंज से उत्पन्न हुई हैं।
जब देवी प्रकट हुई तब उन्होंने अपनी माताओं महालक्ष्मी, सरस्वती एवं काली से पूछा कि हे माता मेरी उत्पत्ति आपने किस प्रयोजन से किया है, इस पर देवियों ने कहा कि संसार में धर्म की रक्षा एवं भक्तों के कल्याणार्थ हमने भगवान विष्णु की प्रेरणा से तुम्हें उत्पन्न किया है।

देवियों के निर्देश के अनुसार भगवती वैष्णो देवी रामेश्वरम के पास पण्डित रत्नाकर के घर में उत्पन्न हुईं, पण्डित रत्नाकर ने इस कन्या का नाम त्रिकुटा रखा, देवी त्रिकुटा बाल्यावस्था से ही भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहने लगी, इनकी भक्ति एवं दिव्य तेज को देखकर ऋषिगण प्रभावित होने लगे, ऐसी मान्यता है कि जब त्रिकुटा नौ वर्ष की हुई तब उन्हें ज्ञात हुआ कि भगवान विष्णु ने श्री रामचन्द्र के रूप में अवतार लिया है तब देवी त्रिकुटा उन्हें पति रूप में पाने के लिए अपने पिता से आज्ञा लेकर वर्तमान रामेश्वरम् के पास ही तपस्या करने लगी। सीता की तलाश करते हुए जब भगवान श्री राम रामेश्वरम् के पास पहुंचे तब देवी त्रिकुटा को भगवान रामचन्द्र के दर्शन हुए, त्रिकुटा ने भगवान राम से विवाह की इच्छा जताई तब राम जी ने कहा कि वह इस अवतार में उन्होंने सीता को एक पत्नीव्रत का वचन दिया है अत: वह दूसरा विवाह नहीं कर सकते।

त्रिकुटा ने जब राम जी से काफी उनुरोध किया तब उन्होंने कहा कि वह अभी सीता की तलाश में जा रहे हैं, लौटते समय मैं आकर आपसे मिलूंगा उस समय यदि आपने मुझे पहचान लिया तो मैं तुमसे विवाह कर लूंगा, देवी त्रिकूटा ने इस शर्त को स्वीकार कर लिया,

रावण वध के पश्चात अयोध्या लौटते समय अपने वचन का पालन करने के लिए भगवान श्रीराम जब त्रिकुटा के पास पहुंचे तब त्रिकुटा भगवान की भक्ति में इस तरह खोई हुई थी कि वह श्री राम को पहचान नहीं पायी, भगवान राम ने कहा त्रिकुटा तुमने मुझे नहीं पहचाना अत: इस अवतार में मैं तुमसे विवाह नहीं करूंगा।

कलियुग में जब मेरा कल्कि अवतार होगा उस समय मैं आकर तुमसे विवाह करूंगा, इस अवधि के बीच तुम उस गुफा में निवास करो जहां लक्ष्मी, सरस्वती एवं काली ये तीनों महाशक्तियां पिण्डी रूप में निवास करती हैं. भक्तगण वहां तुम्हारी पूजा वैष्णो देवी के रूप में करेंगे, भगवान श्री राम के आदेशानुसार देवी त्रिकुटा त्रिकुट पर्वत पर तीनों महाशक्तियों के साथ उस गुफा में निवास करती हैं जिसे भक्तगण वैष्णों देवी की गुफा के नाम से पुकारते हैं